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डरावना सपना देखना कोई बीमारी नहीं है, लेकिन जब यह बार-बार हो, दिनभर काम करने की क्षमता कम करे, दिमाग में उसकी यादें बनी रहें या व्यक्ति सोने से ही डरने लगे, तब इसे नाइटमेयर डिसऑर्डर माना जाता है. ऐसे लोगों में अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, याददाश्त में कमी और बुरे सपनों का लगातार डर देखने को मिलता है. बच्चों में यह समस्या होने पर माता-पिता की नींद भी प्रभावित होती है.

मन में कोई तनाव हो तो उसे डायरी में लिख देने से आप हल्के होकर सो पाते हैं 

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अगर आपकी नींद का कोई तय समय नहीं है, या आप देर रात भारी खाना खाते हैं तो इसका असर भी सपनों पर पड़ता है। पेट भारी होने से शरीर को आराम नहीं मिल पाता और नींद की गुणवत्ता घट जाती है। इसके अलावा, ज्यादा चाय, कॉफी या मीठे पदार्थों का सेवन भी मस्तिष्क को उत्तेजित कर देता है जिससे बुरे सपनों की आशंका बढ़ जाती है।

रात को ध्यान या मेडिटेशन करके सोने से बुरे सपने नहीं आते हैं 

ये सपने तब आते हैं, जब आप या तो कोई भूतिया फिल्म देख लेते हैं.

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सपने हमारी मेंटल हेल्थ को कई प्रकार से प्रभावित करते है। चित्र-अडोबी स्टॉक

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हेल्दी स्लीप एनवायरनमेंट क्रिएट करें: अपने कमरे में अंधेरा, शांत और ठंडा या गर्म (मौसम के अनुकूल) वतावरण बनाएं, इससे एक बेहतर गुणवत्ता वाली नींद प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

रिलैक्सेशन तकनीक: एक्सपर्ट के अनुसार बिस्तर पर जाने से पहले तनाव के स्तर को प्रबंधित करने के लिए मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, मसल्स रिलैक्सेशन का अभ्यास करें। इस प्रकार आपका दिमाग रिलैक्स रहता है और आपको बुरे सपने नहीं आते।

बुरे सपने कभी भी और क‍िसी भी उम्र में सोने के बाद आ सकते हैं.

बुरे सपने आने का कारण ज्‍यादा read more स्‍ट्रेस लेना भी हो सकता है,ज्‍यादा स्‍ट्रेस लेने से अन‍िद्रा की समस्‍या हो जाती है और आपको बुरे सपने आ सकते हैं

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